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Friday, December 16, 2011
जो तुम तोड़ो पिया मैं नहीं तोडू
कृष्ण
जो तुम तोड़ो पिया मैं नहीं तोडू
तोरी प्रीत तोड़ी कृष्ण कौन संग जोडू
तुम भये तरुवर मैं भई पंखिया
तुम भये सरोवर मई तेरी मंछिया
तुम भये गिरिवर मैं भई कर
तुम भये चंदा हम भई चकोरा
तुम भये मोती प्रभु हम भई धागा
तुम भये सोना हम भई खागा
मीरा कहे प्रभु ब्रिज के वासी
तुम मेरे ठाकुर मैं तेरी दासी
खूबसूरत है वो मुस्कान
खूबसूरत है वो मुस्कान जो "श्री कृष्ण" को देख कर खिल जाए
खूबसूरत है वो दिल जो "श्री कृष्ण" के प्यार के रंग मे रंग जाए
खूबसूरत है वो एहसास जिस मे "श्री कृष्ण" के प्यार की मिठास हो
खूबसूरत है वो आँखे जिनमे "श्री कृष्ण" के खूबसूरत ख्वाब समा जाएँ
खूबसूरत है वो आसूँ जो "श्री कृष्ण" के ग़म मे बह जाएँ
.........................................................
"श्री कृष्ण" "श्री कृष्ण" "श्री कृष्ण" "श्री कृष्ण" "श्री कृष्ण" "श्री कृष्ण"
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तू ही मेरा सहारा मुरलीवाले
तेरे बिन मेरा न गुजारा मुरलीवाले
तेरी याद मोहे पल पल सतावे
हर पल चैन करार छीन मुझसे ले जावे
अश्रु जल आँखों में ले आवे
तू ही मेरे हर पल साथ निभावे
तू ही मेरा सखा,तू ही प्राण प्रीतम
तेरी ही राह यह आँखें कबसे निहारे
जनम जनम से तू ही साथ निभावे
अब तो आ जा मुरलीवाले
►कान्हा जी हमे अपनी पायल नही तो
►कान्हा जी हमे अपनी पायल नही तो
►पायल का एक घुँघरू ही बना लो
►और उसे अपने चरणकमलों से लगा लो
►कान्हा जी हमे अपने कंगन नही तो
►...कंगन में जड़ा हुआ एक पत्थर ही बना दो
►और उसे अपनी प्यारी कलाईयों में सजा लो
►कान्हा जी हमे अपनी मुरली नही तो
►अपनी मुरली की कोई धुन ही बना लो
►और उसे अपने अधरों से इक बार तो बजा लो
►कान्हा जी और कुछ नही तो अपने
►चरणों की धूल ही बना लो
►वो चरणधूल फिर ब्रज में उड़ा दो
►सच कहूँ मेरे कान्हा जी देखना फिर
►चरणों की धूलकण बन कैसे इतराऊँ मै....
Thursday, December 15, 2011
Paar Laga De Mori Naiyya-Bhajan
तू ही बन जा ..
तू ही बन जा मेरा मांझी पार लगा दे मेरी नैया .
हे नटनागर कृष्ण कन्हैया पार लगा दे मेरी नैया ..
इस जीवन के सागर में हर क्षन लगता है डर मुझ्को .
क्या भला है क्या बुरा है तू ही बता दे मुझ्को .
हे नटनागर कृष्ण कन्हैया पार लगा दे मेरी नैया ..
क्या तेरा और क्या मेरा है सब कुछ तो बस सपना है .
इस जीवन के मोहजाल में सबने सोचा अपना है .
हे नटनागर कृष्ण कन्हैया पार लगा दे मेरी नैया .
Hai Aankh Woh Jo Shyam Ka Darshan-Bhajan
है आँख वो जो श्याम का दर्शन किया करे,
है शीश जो प्रभु चरण में वंदन किया करे...
बेकार वो मुख है जो व्यर्थ बातों में,
मुख है वो जो हरिनाम का सुमिरण किया करे...
हीरे मोती से नहीं शोभा है हाथ की,
है हाथ जो भगवान् का पूजन किया करे...
मर के भी अमर नाम है उस जीव का जग में,
प्रभु प्रेम में बलिदान जो जीवन किया करे...
ऐसी लागी लगन, ऐसी लागी लगन...
लागी लागी रे लगन, लागी लागी रे लगन...
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गयी मगन...
वो तो गली गली हरि गुण गाने लगी...
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गयी मगन...
वो तो गली गली हरि गुण गाने लगी...
महलों में पली, बन कर जोगन चली...
मीरा रानी दीवानी कहाने लगी...
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गयी मगन...
वो तो गली गली हरि गुण गाने लगी...
कोई रोके नहीं, कोई टोके नहीं...
मीरा गोविन्द गोपाल गाने लगी...
कोई रोके नहीं, कोई टोके नहीं...
मीरा गोविन्द गोपाल गाने लगी...
बैठी संतो के संग, रंगी मोहन के रंग...
मीरा प्रेमी प्रियतम को मनाने लगी...
वो तो गली गली हरि गुण गाने लगी...
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गयी मगन...
वो तो गली गली हरि गुण गाने लगी...
महलों में पली, बन कर जोगन चली...
मीरा रानी दीवानी कहाने लगी...
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गयी मगन...
वो तो गली गली हरि गुण गाने लगी...
राणा ने विष दिया, मानो अमृत पीया...
मीरा सागर में सरिता समाने लगी...
राणा ने विष दिया, मानो अमृत पीया...
मीरा सागर में सरिता समाने लगी...
दुःख लाखों सहे, मुख से गोविन्द कहे...
मीरा गोविन्द गोपाल गाने लगी...
वो तो गली गली हरी गुण गाने लगी...
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गयी मगन...
वो तो गली गली हरि गुण गाने लगी...
महलों में पली, बन कर जोगन चली...
मीरा रानी दीवानी कहाने लगी...
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गयी मगन...
वो तो गली गली हरि गुण गाने लगी...
!! जय हो मीरा बाई सा की !!
!! जय हो मीरा बाई सा की !!
!! जय हो मीरा बाई सा की !!
Monday, October 31, 2011
||| यशोदा के लल्ला |||
माखन चुराने आते हो, दिल ही चुराए जाते हो
करते हो अठखेलियाँ नित नए स्वाँग रचाते हो
यशोदा के लल्ला क्यों नित नित हमें सताते हो
करते हो माखन चोरी फिरभी ब्रिज राज कहाते हो
किससे करें शिकायत सुनती नहीं तुम्हारी मैया
भोली भाली बातों से क्या क्या तुम पाठ पढ़ाते हो
मन बेचैन हो जाता है जब नज़रों से दूर हो जाते हो
नैनों में चमक आ जाती है जब गैया चराके आते हो
ये "इश्क" का कैसा मंज़र है, जादू है उस मधुर धुन में
हिरनियाँ भी दौड़ी आती है जब बंसी तुम बजाते हो
माखन चुराने आते हो, दिल ही चुराए जाते हो
करते हो अठखेलियाँ नित नए स्वाँग रचाते हो
यशोदा के लल्ला क्यों नित नित हमें सताते हो
करते हो माखन चोरी फिरभी ब्रिज राज कहाते हो
किससे करें शिकायत सुनती नहीं तुम्हारी मैया
भोली भाली बातों से क्या क्या तुम पाठ पढ़ाते हो
मन बेचैन हो जाता है जब नज़रों से दूर हो जाते हो
नैनों में चमक आ जाती है जब गैया चराके आते हो
ये "इश्क" का कैसा मंज़र है, जादू है उस मधुर धुन में
हिरनियाँ भी दौड़ी आती है जब बंसी तुम बजाते हो
Sunday, October 30, 2011
जब से तोरे संग नेहा लागे कान्हा
जब से तोरे संग नेहा लागे कान्हा
दूजा नाहिं मन भायो
दूजा नाहीं मन भायो
मनवा मोरा इत उत डोलत
इक पल चैन न पाए
तोरी प्रीत की डोरी संग बंध
इत उत जा ना पाए
चरणों में मुझे ले लो प्रभुजी
अब ना भटका जाए
आ जा रे मोरे कान्हा
आ जा रे (३)
दोउ नैना बाट निहारे तोरी
हर पल बरसत जाए
आवन की तोरी आस ले कर
इक पल झपक ना पाए
मन मंदिर में आ जा प्रभुजी
अब ना जाने दूंगी
आ जा रे मोरे कान्हा तू
आ जा रे (३)
मन ही तेरा कृष्ण कन्हैया
मन ही तेरी राधा
जग में रह कर जो भी करता
है उसकी अभिलाषा
दे ऐसा वरदान मधु अब
मधु श्याम मन भाये
आ जा रे मोरे कान्हा तू
आ जा रे (३)
प्रीतम बोलो कब आवोगे
प्रीतम बोलो कब आवोगे मोहन बोलो आओगे प्रीतम बोलो कब आओगे
कब वीना की झंकारो पेय कोई अमर गीत बन छावोगे
प्रीतम बोलो कब आवोगे मोहन बोलो आओगे प्रीतम बोलो कब आओगे
यह प्यार भरा दिल रोता है थराते लम्बे साँसों में आसुँ की माल पिरोता है
अंधियारी सुनी कुंजों में रातों भर बात जू होता है हंसते इथ्रातें प्यार भरे
प्रीतम बोलो कब आवोगे मोहन बोलो आओगे प्रीतम बोलो कब आओगे
प्रीतम बोलो कब आवोगे मोहन बोलो आओगे प्रीतम बोलो कब आओगे
सब प्यार जगत का झूठा है कुछ मान भाग्य अप ने पर था पर वो भी समझी फूटा है
ओह बिगड़ी बना ने वाले क्या तूं भी मुझ से रूठा है सब दूर करो झंझट मेरे
प्रीतम बोलो कब आवोगे मोहन बोलो कब आवोगे
भीगे भीगे नैना तेरी बात तका करते है सुनी सुनी रातों में हम तुम्हे पुकारा करते है
प्रीतम बोलो कब आवोगे मोहन बोलो आओगे प्रीतम बोलो कब आओगे
जोगन आँचल फेल्लां निकली जग लाज के बंधन तोड़ चली
कुल कान की आन मिटा निकली सारे श्रृंगार बखेर दिए
एक भगवा भेष बना निकली में तेरी मोहन तेरी हूँ
में तेरी प्यारे तेरी हूँ में जैसी हूँ अब तेरी हूँ में तेरी मोहन तेरी हूँ
प्रीतम बोलो कब आवोगे मोहन बोलो आओगे प्रीतम बोलो कब आओगे
जब शरद चंदर नभ मंडल को अप नि किरणों से धोता है
प्रेमी चकोर निज प्रीतम के दर्शन कर हर्षित होता है
इस शरद चांदनी रातों में यह संसार सुखियो हो सोता है
उस वक़्त मुझे नींद कहाँ दिल तड़फ तड़फ कर रोता है
श्री क्रिशन मुख चंदर बिना इस शरद चंदर सों काम नहीं
मेरे जीवन के सब दिन बीत चले पर आये मिले घन शाम नहीं
प्रीतम बोलो कब आओगे प्रीतम बोलो कब आवोगे मोहन बोलो आओगे प्रीतम बोलो कब आओगे
कब वीना की झंकारो पेय कोई अमर गीत बन छावोगे
प्रीतम बोलो कब आवोगे मोहन बोलो आओगे प्रीतम बोलो कब आओगे
यह प्यार भरा दिल रोता है थराते लम्बे साँसों में आसुँ की माल पिरोता है
अंधियारी सुनी कुंजों में रातों भर बात जू होता है हंसते इथ्रातें प्यार भरे
प्रीतम बोलो कब आवोगे मोहन बोलो आओगे प्रीतम बोलो कब आओगे
प्रीतम बोलो कब आवोगे मोहन बोलो आओगे प्रीतम बोलो कब आओगे
सब प्यार जगत का झूठा है कुछ मान भाग्य अप ने पर था पर वो भी समझी फूटा है
ओह बिगड़ी बना ने वाले क्या तूं भी मुझ से रूठा है सब दूर करो झंझट मेरे
प्रीतम बोलो कब आवोगे मोहन बोलो कब आवोगे
भीगे भीगे नैना तेरी बात तका करते है सुनी सुनी रातों में हम तुम्हे पुकारा करते है
प्रीतम बोलो कब आवोगे मोहन बोलो आओगे प्रीतम बोलो कब आओगे
जोगन आँचल फेल्लां निकली जग लाज के बंधन तोड़ चली
कुल कान की आन मिटा निकली सारे श्रृंगार बखेर दिए
एक भगवा भेष बना निकली में तेरी मोहन तेरी हूँ
में तेरी प्यारे तेरी हूँ में जैसी हूँ अब तेरी हूँ में तेरी मोहन तेरी हूँ
प्रीतम बोलो कब आवोगे मोहन बोलो आओगे प्रीतम बोलो कब आओगे
जब शरद चंदर नभ मंडल को अप नि किरणों से धोता है
प्रेमी चकोर निज प्रीतम के दर्शन कर हर्षित होता है
इस शरद चांदनी रातों में यह संसार सुखियो हो सोता है
उस वक़्त मुझे नींद कहाँ दिल तड़फ तड़फ कर रोता है
श्री क्रिशन मुख चंदर बिना इस शरद चंदर सों काम नहीं
मेरे जीवन के सब दिन बीत चले पर आये मिले घन शाम नहीं
प्रीतम बोलो कब आओगे प्रीतम बोलो कब आवोगे मोहन बोलो आओगे प्रीतम बोलो कब आओगे
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